1916 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार से समान सुधारों की मांग शुरू की। 1906 से मुस्लिम लीग अलग निर्वाचक मंडल की मांग कर रही थी। लखनऊ समझौते के तहत कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने प्रांतीय विधायिकाओं में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने पर सहमति जताई।
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