शेरशाह सूरी का अंतिम अभियान 1545 ईस्वी में बुंदेलखंड के राजपूत किले कालिंजर के खिलाफ था। इस अभियान के दौरान घायल होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र जलाल खान ने इस्लाम शाह सूरी की उपाधि ग्रहण की।
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