अप्पेमिडी आम जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रहा है, और विशेषज्ञ अघनाशिनी घाटी में इसके स्थल-पर संरक्षण (in-situ conservation) की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। यह एक विशिष्ट किस्म है, जो केवल कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा जिलों में पाई जाती है। यह आम आकार में छोटा, कोमल और अत्यंत मूल्यवान होता है, जिसे अक्सर "कच्चे आमों का राजा" कहा जाता है। अपने गूदेदार बनावट, विशिष्ट सुगंध और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण इसका दक्षिण एशियाई अचार उद्योग में व्यापक उपयोग होता है। इसे 2009 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हुआ, जो इसके सांस्कृतिक और पाक महत्व को मान्यता देता है।
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