ऐसा ग्राम जिसमें न तो मूल रैयत हो और न ही ग्राम प्रधान
संथाल परगना किरायेदारी (पूरक प्रावधान) अधिनियम, 1949 की धारा 4(ix) के अनुसार, “विशेष ग्राम” या “खास ग्राम” वह ग्राम है जिसमें न तो मूल रैयत (मूलरैयत) होता है और न ही ग्राम प्रधान/मुखिया। दोनों पदों की अनुपस्थिति ही विशेष ग्राम की पहचान है। यह प्रावधान संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी भूमि अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित है।
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