ताना भगत आंदोलन अप्रैल 1914 में प्रारंभ हुआ था। इसका नेतृत्व छोटानागपुर क्षेत्र में ओरांव जनजाति के जात्रा भगत और तुरिया भगत ने किया। इस आंदोलन में ब्रिटिश करों, शोषणकारी जमींदारों, साहूकारों और मिशनरियों के विरुद्ध विरोध किया गया। अनुयायियों ने अहिंसा और सत्याग्रह जैसे तरीकों को अपनाया तथा बेगारी, भूमि-वंचना, पशु बलि और मद्यपान का विरोध किया। यह आंदोलन आगे चलकर व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन से भी जुड़ा।
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