झारखंड की हो जनजाति ने 1820–21 में पश्चिम सिंहभूम में ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों के विरुद्ध एक व्यापक विद्रोह प्रारंभ किया था। इस विद्रोह का नेतृत्व पराहट के राजा ने ब्रिटिश अधिग्रहण और शोषण के विरोध में किया। इस विद्रोह से जनजातीय स्वायत्तता बाधित हुई और यह 1827 तक चला। यह ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध हो जनजाति का प्रथम प्रमुख प्रतिरोध था। इसके बाद 1831–33 का कोल विद्रोह सहित अन्य जनजातीय आंदोलन हुए। इन संघर्षों के उपरांत 1837 में अंग्रेजों ने कोल्हान सरकारी संपदा की स्थापना की।
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