झारखंड में लाल मिट्टी सर्वाधिक पाई जाती है। यह मुख्यतः ग्रेनाइट और ग्नाइस जैसी क्रिस्टलीय चट्टानों के अपक्षय से बनती है तथा लौह ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है। उचित प्रबंधन के साथ इसमें धान, गेहूँ, मक्का, दालें और तिलहन जैसी फसलें उगाई जा सकती हैं। लेटराइट मिट्टी पलामू और सिंहभूम जैसे पहाड़ी-पठारी क्षेत्रों में मिलती है, जलोढ़ मिट्टी नदी घाटियों तक सीमित है, जबकि काली मिट्टी झारखंड में बहुत कम क्षेत्रों में पाई जाती है।
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