बिरसा मुंडा (1875-1900) झारखंड के प्रमुख आदिवासी नेता थे। उन्होंने छोटानागपुर में ब्रिटिश भूमि नीतियों के विरुद्ध ‘उलगुलान’ आंदोलन का नेतृत्व किया। मुंडा सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों में उन्हें “धरती आबा” कहा जाता था, जिसका अर्थ ‘धरती के पिता’ है। यह संबोधन आदिवासी भूमि, अधिकार और संस्कृति के रक्षक के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाता है।
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