चुआर विद्रोह 1767 से 1833 के बीच बंगाल और झारखंड के जंगलमहल क्षेत्र में हुआ था। इसकी शुरुआत 1767 में अंग्रेजों द्वारा मिदनापुर के मिट्टी के किलों को नष्ट किए जाने के बाद मानी जाती है। जमींदार जगन्नाथ सिंह पातर ने 1768 में हजारों भूमिज जनजातियों का नेतृत्व करते हुए विद्रोह आरंभ किया। दुबराज, सुबला सिंह और श्याम गंजन सहित कई नेताओं ने 1771 तक इस आंदोलन को और तीव्र किया। वर्ष 1769 इस विद्रोह के प्रारंभिक चरण में आता है।
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