एवियोली छोटे गुब्बारे जैसे थैले होते हैं जिनका व्यास लगभग 200-500 माइक्रोमीटर होता है। ये फेफड़ों के श्वसन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। प्रत्येक एवियोली ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के आदान-प्रदान में मदद करता है, जिससे सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया सुचारू रूप से होती है। ये गुब्बारेनुमा संरचनाएँ फेफड़ों में लगभग 70 वर्ग मीटर क्षेत्र को कवर करती हैं, जिससे गैसों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है।
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