आदिवासी महासभा की स्थापना 1938 में छोटा नागपुर क्षेत्र में की गई थी। इस संगठन के नेतृत्व में जयपाल सिंह मुंडा की प्रमुख भूमिका रही। 1939 में विभाजन के बाद थेबल/थेबले ओरांव ने ‘सनातन आदिवासी महासभा’ का गठन किया। आगे चलकर यह संगठन आदिवासी राजनीतिक चेतना और पृथक झारखंड राज्य की मांग से जुड़ा रहा। 5 मार्च, 1949 को इसका पुनर्गठन ‘झारखंड पार्टी’ के रूप में किया गया।
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