संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट "IPBES ग्लोबल असेसमेंट" को IPBES (Intergovernmental Science-Policy Platform on Biodiversity and Ecosystem Services) ने जारी किया है। इसे 50 देशों के 145 विशेषज्ञ लेखकों ने तैयार किया है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 10 लाख जीव-जंतु और पौधों की प्रजातियां विलुप्ति के खतरे में हैं, जिनमें से कई आने वाले दशकों में समाप्त हो सकती हैं। यह संख्या मानव इतिहास में पहले से कहीं अधिक है। संकटग्रस्त सूची में 40% से अधिक उभयचर प्रजातियां, लगभग 33% प्रवाल भित्ति बनाने वाले कोरल और एक तिहाई से अधिक समुद्री स्तनधारी शामिल हैं। यह अध्ययन उभरते शोध का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो दर्शाता है कि प्रदूषण, आवास विनाश और कार्बन उत्सर्जन के परस्पर प्रभाव से उत्पन्न जोखिमों से बचने के लिए दुनिया को एक नए आर्थिक मॉडल को अपनाने की आवश्यकता हो सकती है। रिपोर्ट बताती है कि अभी भी बदलाव संभव है, लेकिन इसके लिए स्थानीय से वैश्विक स्तर तक तुरंत कदम उठाने होंगे। IPBES का मुख्यालय जर्मनी के बॉन में स्थित है।
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