1857 में पलामू के विद्रोह का नेतृत्व नीलांबर और पीतांबर ने किया था। वे खरवार जनजाति के भोगता गोत्र के प्रमुख थे। उन्होंने 21 अक्टूबर 1857 को लगभग 500 सैनिकों की एक संगठित सेना बनाई। इस विद्रोह का मुख्य लक्ष्य ब्रिटिश अधिकारी लेफ्टिनेंट ग्राहम था, जिसमें चेरो जागीरदार भी सम्मिलित थे। मेजर कॉटर और कर्नल डाल्टन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने फरवरी 1858 तक इस विद्रोह को दबा दिया। गणपत राय ने पलामू में नहीं, बल्कि लोहरदगा क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व किया था।
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