हाल ही में एक पूर्व-हिस्पैनिक ममी के DNA अध्ययन से पता चला है कि स्कार्लेट फीवर उत्पन्न करने वाले जीवाणु यूरोपीय उपनिवेशीकरण से पहले ही अमेरिका में मौजूद थे। स्कार्लेट फीवर, जिसे स्कार्लेटिना भी कहा जाता है, ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस नामक जीवाणु से होने वाला संक्रमण है, जो गले के संक्रमण (स्ट्रेप थ्रोट) और त्वचा संक्रमण का कारण बनता है। यह मुख्यतः 5 से 15 वर्ष के बच्चों को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में चमकीला लाल चकत्ता, गले में खराश और तेज बुखार शामिल हैं। यह अत्यधिक संक्रामक रोग है, जो खांसी या छींक से निकलने वाली श्वसन बूंदों के माध्यम से फैलता है। इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन पेनिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं से इसका प्रभावी उपचार संभव है। अनुपचारित रहने पर यह हृदय और गुर्दों से संबंधित गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न कर सकता है।
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