एक हालिया अध्ययन में सोनोवाल कचारी समुदाय द्वारा बुखार, खांसी, गुर्दे की पथरी तथा त्वचा रोगों के उपचार में उपयोग किए जाने वाले 39 पौधों का दस्तावेजीकरण किया गया है। सोनोवाल कचारी उत्तर-पूर्व भारत की एक स्वदेशी जनजाति है, जिनकी अधिकांश आबादी असम में निवास करती है। वे राज्य की तीसरी सबसे बड़ी मैदानी जनजाति तथा सबसे प्राचीन समुदायों में से एक हैं। इनके छोटे समूह अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में भी पाए जाते हैं। असम में इन्हें अनुसूचित जनजाति (मैदानी) का दर्जा प्राप्त है। "सोनोवाल" शब्द सोने से संबंधित है, जो अहोम काल में सोने की धुलाई (गोल्ड पैनिंग) के उनके पारंपरिक व्यवसाय को दर्शाता है।
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