सेराइकेला छऊ झारखंड के सेराइकेला-खरसावां जिले की एक पारंपरिक मुखौटा-नृत्य शैली है। यह मार्शल आर्ट ‘परिखंडा’ की तकनीकों से विकसित मानी जाती है। इसका प्रदर्शन मुख्यतः पुरुष कलाकारों द्वारा वसंत ऋतु के त्योहारों, जैसे चैत्र पर्व, के दौरान किया जाता है। इसमें कागज, कपास और मिट्टी से बने मुखौटे पहने जाते हैं तथा ढोल, धुमसा, मोहरी और शहनाई जैसे लोक वाद्ययंत्रों की संगति रहती है। इसकी कथावस्तु प्रायः रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों पर आधारित होती है।
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