राजस्व विभाग के लिपिक
वज़ीर के कार्यालय को दीवान-ए-विजारत कहा जाता था। इसी विभाग में उनके अधीन नायब वज़ीर नामक एक उप अधिकारी होता था। यह विभाग वित्त से संबंधित कार्य संभालता था। साम्राज्य की आय और व्यय की देखरेख दो अधिकारी करते थे – मुशरिफ-ए-मुमालिक (आय) और मुस्तौफी-ए-मुमालिक (व्यय)। इनके अधीन कार्यालय में कार्य करने वाले लिपिकों को अमिल, कारकुन और मुतस्सर्रिफ कहा जाता था।
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