कृष्णा नदी के डेल्टा पर स्थित मछलीपट्टनम 17वीं शताब्दी में डच और अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनियों के लिए एक प्रमुख बंदरगाह था। डचों ने यहां एक किला बनाया था और स्थानीय व विदेशी व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा से यह समृद्ध हुआ। 1686-1687 में मुगल सम्राट औरंगजेब ने गोलकुंडा पर कब्जा कर लिया, जिससे यूरोपीय व्यापारियों ने बंबई, कलकत्ता और मद्रास की ओर रुख किया। इससे 18वीं शताब्दी में मछलीपट्टनम का पतन शुरू हुआ। यह शहर अपने कलमकारी वस्त्रों के लिए भी प्रसिद्ध था।
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