यह जैन समुदाय का वार्षिक पर्व है। यह 'पर्युषण पर्व' का अंतिम दिन होता है, जो जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय का सबसे पवित्र उत्सव है। संवत्सरी क्षमा के दिन के रूप में विशेष महत्व रखती है। इस दिन जैन सभी जीवों से अपने जाने-अनजाने में हुए दोषों के लिए क्षमा मांगते हैं।
This Question is Also Available in:
Englishಕನ್ನಡ