बालकिरण और दिव्यज्योति
‘बालकिरण’ और ‘दिव्यज्योति’ श्रीनिवास पानूरी द्वारा 1956 में प्रकाशित खोरठा साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने लिखित खोरठा साहित्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। इन कृतियों में दार्शनिक चिंतन, सामाजिक विषयवस्तु और काव्यात्मक अभिव्यक्ति परिलक्षित होती है। श्रीनिवास पानूरी के प्रयासों ने खोरठा भाषा को मौखिक परंपरा से आगे बढ़ाकर लिखित परंपरा में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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