सूरत की समृद्धि से आकर्षित होकर शिवाजी ने जनवरी 1664 और अक्टूबर 1670 में दो बार आक्रमण किया। इन हमलों से उन्होंने औरंगजेब को कड़ा संदेश दिया। 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर था और अत्यंत समृद्ध था।
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