विजयसेन के शासनकाल में श्री हर्ष उनके दरबार में रहते थे। उनकी रचनाएँ "गौड़ोर्विश्कुलप्रशस्ति" (गौड़ राजवंश की प्रशंसा) और "विजयप्रशस्ति" (विजय की प्रशंसा) सेन वंश के राजा विजयसेन के शासन से प्रेरित थीं।
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