"रूर पर कब्जा" सैन्य हमले की घटना जर्मनी में हुई थी। यह प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में हुई राजनीतिक हिंसा (1918-33) के हिस्से के रूप में हुआ। 11 जनवरी 1923 से 25 अगस्त 1925 तक फ्रांस और बेल्जियम ने जर्मनी के रूर क्षेत्र पर सैन्य कब्जा किया। जर्मनी के प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय संधि के तहत निर्धारित क्षतिपूर्ति भुगतान में चूक करने पर फ्रांस और बेल्जियम ने इस औद्योगिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस कब्जे से जर्मनी में आर्थिक संकट और गहरा गया। जर्मन नागरिकों ने निष्क्रिय प्रतिरोध और सिविल अवज्ञा में भाग लिया, जिसमें 130 लोग मारे गए। आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण फ्रांस और बेल्जियम ने 1924 में जर्मनी के युद्ध क्षतिपूर्ति भुगतान को पुनर्गठित करने के लिए डाव्स योजना स्वीकार की और अगस्त 1925 तक अपनी सेनाएं हटा लीं। इस घटना ने जर्मनी के पुन: सैन्यीकरण और कट्टरपंथी दक्षिणपंथी आंदोलनों के उभार में योगदान दिया।
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