"राजतरंगिणी" 12वीं शताब्दी में कश्मीरी कवि-इतिहासकार कल्हण द्वारा लिखी गई थी, जो कश्मीर का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करती है। यह अपनी व्यापकता और ऐतिहासिक तथ्यों के प्रति निष्ठा के लिए प्रसिद्ध है। भारतीय उपमहाद्वीप में इतिहासलेखन के पहले प्रयास के रूप में मानी जाने वाली राजतरंगिणी कश्मीर का इतिहास प्रस्तुत करती है, जो पौराणिक प्राचीनता से लेकर 12वीं शताब्दी तक है। यह संस्कृत भाषा में लिखी गई थी और इसमें 7800 से अधिक श्लोक हैं।
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