जलियांवाला बाग हत्याकांड
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर, पंजाब में जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। इसके विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने 30 मई 1919 को अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटा दी। वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, "मैं सभी विशेष उपाधियों को त्यागकर अपने उन देशवासियों के साथ खड़ा होना चाहता हूं, जिन्हें उनकी नगण्यता के कारण अमानवीय अपमान सहना पड़ता है।" शंकर राम नायर ने वायसराय की परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और सेंट्रल एशियन सोसाइटी की संयुक्त बैठक में भारतीय क्रांतिकारी उधम सिंह ने 75 वर्षीय माइकल ओ'ड्वायर की हत्या कर दी। यह जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध था। एडविन मोंटेग्यू ने ओ'ड्वायर की कठोरता की निंदा करते हुए इसे 'निवारक हत्या' कहा। सी. एफ. एंड्रयूज ने जलियांवाला बाग हत्याकांड को 'नृशंस हत्या' कहा।
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