झारखंड के मुंडा समुदाय में पाहन को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि को डाली-कटारी-भूमि कहा जाता है। पाहन ग्राम के पुजारी एवं धार्मिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है तथा यज्ञ और त्योहारों से संबंधित कर्तव्यों का निर्वहन करता है। मुंडा और पाहन दोनों चंदा (क्विट-रेंट) से मुक्त होते हैं। मंकी प्रशासन के अधीन चपुटा गाँवों में भी पाहन के अधिकार मान्य होते हैं। यह भूमि अनुदान मुंडारी खुंटकट्टी भू-स्वामित्व से भिन्न है और पाहन की पारंपरिक भूमिका को मान्यता प्रदान करता है।
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