नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस
माउंटबेटन योजना के तहत सिंध की विधायी सभा को एक विशेष बैठक में यह तय करना था कि सिंध संपूर्ण रूप से दिल्ली की संविधान सभा में शामिल होगा या उन क्षेत्रों की नई संविधान सभा का हिस्सा बनेगा जो इसमें शामिल नहीं हुए। नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में जनमत संग्रह होना था ताकि यह तय हो सके कि यह प्रांत भारत में रहेगा या पाकिस्तान में शामिल होगा। यह जनमत संग्रह गवर्नर और प्रांतीय सरकार की देखरेख में होना था। बलूचिस्तान को भी यह निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था कि वह भारतीय संघ में बना रहेगा या नहीं।
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