यह मणिपुर की एक भारतीय मार्शल आर्ट है
हुएन लैंगलोन मणिपुर की एक पारंपरिक भारतीय मार्शल आर्ट है। इसका नाम मीतेई भाषा से लिया गया है, जहां "हुएन" का अर्थ युद्ध और "लैंगलोन" का अर्थ ज्ञान या कला होता है।
इस युद्धकला के दो प्रमुख अंग हैं:
हुएन लैंगलोन में मुख्य रूप से थंग (तलवार) और ता (भाला) का उपयोग किया जाता है। अन्य हथियारों में ढाल और कुल्हाड़ी भी शामिल हैं। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, यह कला मीतेई समुदाय के सृष्टिकर्ता तिन सिदाबा से उत्पन्न हुई। 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के दौरान ब्रिटिशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन 1934 में महाराजा चुराचंद ने इसे पुनः शुरू किया।
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