लिंगराज मंदिर को भुवनेश्वर का सबसे प्राचीन और बड़ा मंदिर माना जाता है। 'लिंगराज' शब्द का अर्थ 'लिंगों का राजा' है, जहां 'लिंग' भगवान शिव का प्रतीक है। 11वीं शताब्दी में सोम वंश के राजा ययाति केशरी ने इसे बनवाया था। ऐसा माना जाता है कि जब राजा ने अपनी राजधानी जयपुर से भुवनेश्वर स्थानांतरित की, तब उन्होंने लिंगराज मंदिर का निर्माण शुरू किया। यह मंदिर चार भागों में विभाजित है: गर्भगृह, यज्ञ शाला, भोग मंडप और नाट्य शाला।
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