परदीदेव (परमाल) ने 1182 ईस्वी में महुबा की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान-तृतीय से युद्ध किया था। यह लड़ाई अल्हा खंड (लगभग 12वीं सदी) का विषय है, जो हिंदी में एक प्रारंभिक काव्य रचना है और इसमें बहादुरी के कई गीत शामिल हैं।
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