डैंज़िग को युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में ब्रिटेन द्वारा अधिग्रहित किया गया।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के साथ की गई शांति संधि को वर्साय संधि कहा जाता है। इस संधि के प्रावधानों के अनुसार, 1871 में जर्मनी द्वारा फ्रांस से छीना गया अल्सास-लोरेन क्षेत्र फ्रांस को वापस कर दिया गया। नवगठित पोलैंड राज्य को समुद्र तक पहुंच प्रदान करने के लिए लगभग 65 किमी लंबा गलियारा दिया गया, जिससे पूर्वी प्रशिया बाकी जर्मनी से अलग हो गया। डैंज़िग को एक स्वतंत्र नगर बनाया गया, जो राजनीतिक रूप से राष्ट्र संघ के नियंत्रण में था और आर्थिक रूप से पोलैंड के अधीन था। बेल्जियम, डेनमार्क और लिथुआनिया को जर्मनी से कुछ क्षेत्र प्राप्त हुए। सार क्षेत्र, जो कोयला खनन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, पंद्रह वर्षों के लिए राष्ट्र संघ के नियंत्रण में रखा गया और वहां की खदानें क्षतिपूर्ति के रूप में फ्रांस को सौंप दी गईं। जर्मनी को ऑस्ट्रिया के साथ एकीकरण से वंचित कर दिया गया। राइनलैंड को स्थायी रूप से असैन्यीकृत किया गया और इसे पंद्रह वर्षों तक मित्र देशों की सेना के कब्जे में रखा गया। जर्मनी की सैन्य शक्ति को काफी हद तक सीमित कर दिया गया।
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