विकासवाद का सिद्धांत चार्ल्स डार्विन (1809-1882) ने विकसित किया था। यह सिद्धांत बताता है कि सभी जीवों की प्रजातियाँ छोटे आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होती हैं और प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया से विकसित होती हैं। ये परिवर्तन जीवों की प्रतिस्पर्धा, अस्तित्व और प्रजनन की क्षमता को बढ़ाते हैं। 1859 में डार्विन की पुस्तक "ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज" प्रकाशित होने के बाद इस सिद्धांत को व्यापक वैज्ञानिक स्वीकृति मिली।
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