झारखंड का सदान समुदाय पितृसत्तात्मक है, जिसमें उत्तराधिकार सामान्यतः पिता से पुत्र को प्राप्त होता है। सदान मूलतः गैर-आदिवासी मूल निवासी समुदाय हैं, जो सांस्कृतिक रूप से स्थानीय आदिवासी समाज से कई समानताएँ रखते हैं तथा आर्य और आदिवासी तत्वों का मिश्रण दर्शाते हैं। इनकी पारिवारिक संरचना प्रचलित सनातनी पितृसत्तात्मक मानदंडों का पालन करती है। सदान समाज में मातृवंशीय या पितृवंशीय गोत्र में विवाह वर्जित माना जाता है। मातृसत्तात्मकता के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलते, क्योंकि सामाजिक संरचना में पुरुष-प्रधानता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
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