झारखंड में लौह अयस्क की खदानें मुख्य रूप से पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित हैं। इस जिले की प्रमुख खदानों में नोआमुंडी और किरीबुरु शामिल हैं। पश्चिमी सिंहभूम में लौह अयस्क का सबसे बड़ा भंडार पाया जाता है, जहाँ 3,700 मिलियन टन से अधिक हेमेटाइट संसाधन उपलब्ध होने की बात कही जाती है। भारतीय खान ब्यूरो के अनुसार दुमका और गढ़वा में लौह अयस्क की खदानें महत्वपूर्ण रूप से नहीं पाई जातीं, जबकि रांची भी लौह अयस्क खनन के लिए प्रमुख रूप से प्रसिद्ध नहीं है।
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