झारखंड में ईसाई धर्म का संगठित प्रवेश 1845 में माना जाता है, जब गोस्नर इवेंजेलिकल लूथरन मिशन के चार जर्मन मिशनरी 2 नवंबर 1845 को रांची पहुंचे। इसके बाद 1 दिसंबर 1845 को बेथेस्डा में पहला पूजा स्थल स्थापित किया गया। आगे चलकर 1846 में बपतिस्मा की शुरुआत हुई और 1850 तक ओरांव तथा मुंडा समुदाय के लोगों को बपतिस्मा दिया गया।
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