73वां और 74वां संविधान संशोधन अधिनियम (1992) को “मौन क्रांति” कहा जाता है। इन संशोधनों ने पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा देकर विकेंद्रीकरण को सशक्त किया। इनके माध्यम से स्थानीय स्वशासन को संस्थागत रूप मिला और बाद में PESA, 1996 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका भी अधिक मजबूत हुई।
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