झारखंड की बिरहोर जनजाति को दो उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है—उथलू और थानिया। उथलू घुमंतू शिकारी होते हैं, जो जंगलों में जड़ें और शिकार की तलाश में घूमते हैं। थानिया स्थायी निवासी होते हैं, जो गांवों के निकट स्थायी झोपड़ियाँ बनाकर रहते हैं; इन्हें जांघी/जाघी भी कहा जाता है। यह वर्गीकरण जीवनशैली और निवास के स्वरूप के आधार पर किया गया है।
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