ओरांव कंघी-कट झारखंड की ओरांव आदिवासी महिलाओं द्वारा अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक भित्ति-चित्रकला तकनीक है। इसमें मैंगनीज-समृद्ध काली मिट्टी का आधार तैयार कर उस पर सफेद काओलिन मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है। फिर टूटी हुई कंघियों से सतह को खुरचकर डिज़ाइन बनाए जाते हैं, जिससे सफेद परत पर काली आकृतियाँ उभर आती हैं। इस स्ग्राफिटो विधि में पशु, पौधे और प्रजनन-क्षमता के प्रतीक दर्शाए जाते हैं। इसका उपयोग सोहराई फसल उत्सव और खोवर विवाह चित्रों में किया जाता है। यह तकनीक पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है और इसे प्राचीन गुफा-कला परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
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