बाल गंगाधर तिलक, जो आधुनिक भारत के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे और स्वराज के प्रबल समर्थक थे, ने म्यांमार की जेल में "श्रीमद् भगवद् गीता रहस्य" की रचना की थी। उन्होंने गीता को कर्मयोग का ग्रंथ माना जो निःस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। यह पुस्तक उनके भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता की गहरी समझ को दर्शाती है।
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