अत्यधिक प्रतिध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं
जब हम खाली हॉल में जोर से बोलते हैं तो कुछ समय बाद अपनी ही आवाज़ सुनाई देती है, क्योंकि खाली हॉल में ध्वनि परावर्तित होती है जिससे प्रतिध्वनि उत्पन्न होती है। जब हॉल लोगों से भरा होता है तो ध्वनि कई बार लोगों से टकराकर परावर्तित होती है, जिससे मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि आपस में मिल जाती हैं और सुनने वाले को अलग-अलग ध्वनि का एहसास नहीं होता। प्रतिध्वनि सुनने के लिए सतहों को ध्वनि परावर्तित करनी चाहिए या ध्वनि में स्पष्टता होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, बड़े खुले स्थानों में प्रतिध्वनि अधिक स्पष्ट सुनाई देती है।
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