यह संतुलित अवस्था में बनी रहती है
यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार के बराबर हो तो वह उसी गहराई पर संतुलित रहती है। यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार से अधिक हो तो वह सतह पर आकर तैरने लगती है। यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार से कम हो तो वह डूब जाती है। वस्तु तैरे, डूबे या संतुलित रहे, उत्प्लावक बल हमेशा कार्य करता है।
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