झारखंड में छोटानागपुर किरायेदारी अधिनियम, 1908 की धारा 67A लागू होती है। इसके अनुसार, ‘कोरकर’ भूमि पर पहली फसल के छह वर्ष बाद ही किराया देय होता है। इस प्रावधान का उद्देश्य परती भूमि को धान की खेती में परिवर्तित करने वाले स्थानीय कृषकों को प्रोत्साहन देना है। धारा 64 के अंतर्गत भूमि रूपांतरण के लिए उपायुक्त की अनुमति आवश्यक है। यह अधिनियम छोटानागपुर क्षेत्र में किरायेदारी एवं राजस्व संबंधी व्यवस्थाओं को विनियमित करता है।
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