IIT बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक नई हाई एफिशिएंसी टैंडम सोलर सेल विकसित की है जिसकी पावर कन्वर्ज़न एफिशिएंसी लगभग 30% है, जबकि मौजूदा तकनीक की एफिशिएंसी लगभग 20% है। यह नवाचार नेशनल सेंटर फॉर फोटावोल्टिक रिसर्च एंड एजुकेशन (NCPRE) में विकसित किया गया है और इसमें फोर-टर्मिनल (4T) टैंडम स्ट्रक्चर का प्रयोग किया गया है। इसकी ऊपरी परत अर्ध-पारदर्शी हैलाइड पेरोव्स्काइट से बनी है और निचली परत पारंपरिक सिलिकॉन से, जिससे दोनों स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और दक्षता बेहतर होती है। पेरोव्स्काइट सामग्री, जो बेहतरीन प्रकाश अवशोषण और कम लागत के लिए जानी जाती है, अब 10 वर्षों तक टिकाऊ हो गई है। यह डिज़ाइन गर्मी और कम रोशनी में भी अच्छा प्रदर्शन करता है, जिससे यह भारत की जलवायु के लिए उपयुक्त है और सौर ऊर्जा की लागत ₹1 प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) तक घटाने में मदद करता है। यह उपलब्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में उत्पादन और भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ाकर योगदान देती है।
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