नैनो-विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली
नैनो-विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली ने फ्लोरोमेट्रिक सेंसिंग का उपयोग करके निकोटीन और कोटिनिन का पता लगाने हेतु एक नई सामग्री विकसित की है। फ्लोरोमेट्रिक सेंसिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रतिदीप्ति उत्सर्जन के माध्यम से पदार्थों का मापन किया जाता है। यह सामग्री निकोटीन/कोटिनिन के संपर्क में आने पर प्रकाशित हो जाती है, जिससे त्वरित पहचान संभव होती है। यह आयरन-आधारित मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (Fe-MOF) पर आधारित एक नैनो-संरचित छिद्रपूर्ण सामग्री है। यह पारंपरिक विधियों की तुलना में अत्यंत कम मात्रा में भी सटीक पहचान कर सकती है। यह जैव-संगत है और इन-विट्रो चरण में कार्य करती है।
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