महाराष्ट्र ने 2 दिसंबर 2025 से सभी ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ 5-7% बांस बायोमास या चारकोल मिलाना अनिवार्य किया है। महाराष्ट्र बांस उद्योग नीति 2025 के तहत यह कदम राज्य की ऊर्जा में पहली बार बांस को शामिल करता है। इससे कोयले के उत्सर्जन में कमी, रोजगार सृजन, हरित निवेश और कार्बन क्रेडिट को बढ़ावा मिलेगा।
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