डिबेंचर धारक शेयरधारकों की तरह मालिक नहीं होते बल्कि कंपनी के ऋणदाता होते हैं। उन्हें कंपनी के प्रबंधन में मतदान का अधिकार नहीं होता। डिबेंचर धारकों को कंपनी के ऋणदाता होने के नाते निश्चित अवधि के बाद परिपक्वता पर चुकाना होता है।
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