संथाल जनजाति अपने विश्व-निर्माता को "ठाकुर जी" कहकर संबोधित करती है। संथाल परंपरागत रूप से 'बोंगा' नामक दिव्य आत्माओं की पूजा करते हैं, जिनमें मारंग बुरु प्रमुख देवता हैं। 'ठाकुर जी' संथाल मान्यताओं में सर्वोच्च ईश्वर और सृष्टिकर्ता के लिए प्रयुक्त संस्कृतकृत नाम है। यह अवधारणा हिंदू धर्म की ब्रह्मा-विष्णु-शिव त्रिमूर्ति से भिन्न है और संथाल समुदाय की विशिष्ट आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाती है।
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