लेफ्टिनेंट रूक और चार्ल्स मॉर्गन को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा झारखंड में ढाल विद्रोह को दबाने के लिए भेजा गया था। यह विद्रोह 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लगभग 10 वर्षों तक चला। उनके प्रयासों के बावजूद विद्रोह को तुरंत दबाया नहीं जा सका, जिससे 1777 तक क्षेत्र में ब्रिटिश हस्तक्षेप बढ़ा। संथाल तथा अन्य विद्रोहों को बाद में विभिन्न अधिकारियों द्वारा दबाया गया था, न कि रूक या मॉर्गन द्वारा।
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