भारत में कानूनों की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत इसे यह अधिकार प्राप्त है, जिससे यह संविधान का अंतिम व्याख्याता बनता है। इसके निर्णय पूरे देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं। साथ ही, यह असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की शक्ति भी रखता है, जिससे लोकतंत्र में जांच और संतुलन की व्यवस्था मजबूत होती है।
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