जुलाई 1939 में छोटानागपुर (वर्तमान झारखंड) में थेवले ओरांव के नेतृत्व में सनातन आदिवासी महासभा की स्थापना हुई। यह संगठन गैर-ईसाई आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए आदिवासी महासभा से अलग होकर गठित किया गया था। यह महासभा राष्ट्रवादी आंदोलन से भी जुड़ी रही और ईसाई प्रभाव का विरोध करती थी। उपलब्ध अभिलेखों में जात्रा ओरांव, ज्यूएल लकरा और डोला मुंडा का इस महासभा के नेतृत्व से संबंध नहीं मिलता। सनातन आदिवासी महासभा का उदय 1930 के दशक के उत्तरार्ध में विशेष रूप से आदिवासी समुदायों की पहचान और हितों के संरक्षण के संदर्भ में हुआ था।
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